संघर्ष
मेहनत
मेहनत शरीर को कष्ट जरूर देगी , मन
भी आलस करेगा । फिर तुम विश्राम
करना चहोगे लेकिन ये भी बात है। कि
विश्राम न तो शरीर को आराम दे पाएगा
और न मन को तसल्ली। शरीर तो आराम करने के बाद भी थक जाता है। और मन मांगता है भटकने का रास्ता ।
फिर जब मेहनत करने का समय निकल
जाएगा तब आप मेहनत करना चाहेंगे भी
फिर तुम्हारा तन इतना ताकतवर शायद
न रह पाएगा तब तुम्हें कष्ट भी होगा और
मन भी रोने का नाटक करगा । तो तुम
इस समय क्यों व्यर्थ में गवां रहे हो , क्यों
बरबाद करते हो इतने कीमतो समय को ,
ये समय एक ऐसा धन है , जिसे तुमने
व्यर्थ में बरबसद किया तो तुम्हे रुलाएगा,
दर-दर की ठोकरें खाते फिरोगे कोई सहारा
न देगा तुम्हें ।
अगर इस समय को सतकर्म में लगाया ,
मेहनत करने में लगाया तथा ईशवर भक्ति
में थोड़ा सा भी समय दिया ।
तो दुनिया की कोई भी ताकत
तुम्हें नहीं हरा सकेगी ।
धन्यवाद।
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